ड्रैगन का कर्ज जाल:चीन के लोन से श्रीलंका का खजाना खाली; लिथुआनिया ने चेताया- सावधान हो जाएं यूरोपीय देश

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली l चीन के कर्ज जाल में फंसे देशों की फेहरिस्त में भारत का पड़ाेसी देश श्रीलंका और यूराेपीय देश लिथुआनिया भी शामिल हो गया है। श्रीलंका पर चीन का लगभग 37 हजार करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया है। ये रकम श्रीलंका को इसी साल चुकानी है, जबकि वर्तमान में उसके पास लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है।

श्रीलंका पर कुल मिलाकर 54 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। देश पर कुल कर्ज का लगभग 68% हिस्सा चीन का है। उधर यूरोपीय देश लिथुआनिया के विदेश मंत्री ग्रब्रियेल्स लैंडबर्गिस ने सोमवार को चेताया कि चीन सोची-समझी रणनीति के तहत आर्थिक हमले कर रहा है। लिथुआनिया पर ताइवान को समर्थन देने के नाम पर किए जा रहे इस प्रकार के हमले पूरे यूरोप के लिए बड़ी चेतावनी भी हैं।

देशों को निर्भर बनाकर मनमानी करता है चीन :
लैंडबर्गिस ने कहा कि चीन अपने बाजार को खोलकर पहले देशों को उस पर निर्भर बनाता है, फिर अपने राजनीतिक एजेंडा थोपकर सप्लाई लाइन रोक देता है। चीन ने लिथुआनिया की 60 कंपनियों को पंगु बना दिया है। साथ ही लिथुआनिया की कंपनियों के प्रोडक्ट्स फ्रीज भी कर दिए हैं। चीन की तरफ से लिथुआनिया की सप्लाई लाइन बाधित करने से उसका एक तिहाई के करीब निर्यात भी प्रभावित हो रहा है।

दुनियाभर में कई देश चीनी कर्ज के जाल में फंसकर आर्थिक संकट झेल रहे हैं। इनमें श्रीलंका, लिथुआनिया और मालदीव शामिल हैं I

वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार कोराेना काल में ही सवा 2 करोड़ की आबादी वाले श्रीलंका में लगभग 5 लाख लोग गरीबी की रेखा से नीचे चले गए, 2 लाख की नौकरियां चली गईं।

लिथुआनिया: सबसे बड़े बंदरगाह को खरीदने की साजिश :
चीन ने यूरोप के 17 प्लस प्लान में लिथुआनिया से व्यापार संबंध बढ़ाए। लिथुआनिया की लगभग 60 बड़ी कंपनियों के साथ करार किया, लेकिन दो साल में ही इसे तोड़ दिया। अब लिथुआनिया सरकार को अपनी इन कंपनियों के लिए एक लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान करना पड़ा है। साथ ही चीन ने उसके सबसे बड़े बंदरगाह कायलपेड़ा को खरीदने की साजिश रची थी।

मालदीव: चीन का 23 हजार करोड़ कर्ज, GDP का करीब 53%
एडडाटा रिसर्च लैब की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन दक्षिण एशिया के अन्य देशों पर भी कर्ज का जाल कसता जा रहा है। मालदीव पर चीन का लगभग 23 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। ये मालदीव की GDP का लगभग 53% है। चीन ने मालदीव को कर्ज कॉमर्शियल लोन के नाम पर दिया है। यानी, ये कठोर शर्तों वाला ऊंची ब्याज दर पर दिया गया कर्ज है।

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