UP में मोदी ‘खेल’ गए : चुनाव आयोग की पाबंदी लागू होने से पहले 13 बड़ी रैलियां कीं, दूसरी पार्टियां बस देखती रहीं

थर्ड आई न्यूज

लखनऊ I यूपी में चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य में 7 फेज में 25 दिन में चुनाव हो जाएंगे। साथ ही, चुनाव आयोग ने राज्य में 15 जनवरी तक रैली, सभा, पदयात्रा, साइकिल यात्रा, नुक्कड़ सभाएं, रोड शो करने पर रोक लगा दी है। इसकी वजह कोरोना की थर्ड वेव को बताया है। इसके चलते राजनीतिक दलों को कम से कम अगले 7 दिन तक कैंपेनिंग ऑनलाइन ही करनी पड़ेगी, लेकिन भाजपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उसके सबसे बड़े स्टार कैंपेनर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी तारीख के ऐलान से पहले ही प्रदेश में एक के बाद एक रैलियों का खेला करके अपना काम पूरा कर चुके हैं।

पीएम मोदी ने 16 नवंबर से लेकर 2 जनवरी तक पिछले डेढ़ महीने के दौरान यूपी के हर इलाके में रैली कीं। पूर्वांचल से लेकर वेस्ट यूपी तक पीएम की ताबड़तोड़ 14 चुनावी रैलियां आयोजित की गईं। इन रैलियों के बहाने उन्होंने तमाम नए प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास-उद्घाटन किया। उनकी आखिरी रैली लखनऊ में 9 जनवरी को प्रस्तावित थी। कहा जा रहा था कि इस रैली के बाद ही चुनाव आयोग इलेक्शन की तारीखों का ऐलान करेगा। लेकिन थर्ड वेव की तेजी ने इस रैली को कैंसिल करा दिया। नतीजतन चुनाव आयोग ने भी 10 जनवरी के बजाए दो दिन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इलेक्शन की तारीखें घोषित कर दीं।

इसे संयोग कहेंगे या कुछ और…मोदी ने जिस मेरठ में आखिरी सभा की, वहीं से शुरू होगी वोटिंग :
मेरठ दौरे पर औघड़नाथ मंदिर (कालीपल्टन मंदिर) में मोदी ने पूजा की थी। यहीं से 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई थी।
मेरठ दौरे पर औघड़नाथ मंदिर (कालीपल्टन मंदिर) में मोदी ने पूजा की थी। यहीं से 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई थी।
पहले फेज में यूपी के 11 जिलों की 58 सीटों पर वोटिंग होगी। ये जिले मेरठ, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बुलंदशहर हैं। पीएम ने अपनी आखिरी रैली इन्हीं में से एक मेरठ में की थी। यहां पीएम ने खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। इस जिले के इर्द-गिर्द बागपत, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, शामली और गौतमबुद्धनगर आते हैं, जो मेरठ से सीधे-सीधे प्रभावित होते हैं।

ये इलाका किसान वोटर्स का गढ़ हैं, जिन्हें भाजपा से नाराज बताया जा रहा है। ऐसे में साफ है कि मोदी की आखिरी रैली इन्हीं वोटर्स को मनाने के लिए हुई थी। अब वहीं से चुनाव आयोग ने इलेक्शन की शुरुआत कर दी है। पहले ये भी कहा जा रहा था कि इस बार यूपी में पूर्वांचल से चुनाव होगा। मोदी ने राज्य में पहली जनसभा 16 नवंबर को सुल्तानपुर में की थी। यहां पूर्वांचल एक्सप्रेस का उद्धाटन किया था। यहां पांचवें फेज में चुनाव होंगे।

विपक्ष के नेता बड़ी सभाएं नहीं कर पाए :
प्रियंका गांधी राज्य में पिछले एक साल से सक्रिय हैं। लेकिन बड़ी रैली नहीं कर सकी हैं। वह लड़की हूं, लड़ सकती हूं…कैंपेन को ड्राइव कर रही हैं। इसके साथ प्रतिज्ञा यात्रा भी निकाल चुकी हैं। लेकिन कुछ समय पहले उन्होंने अपनी यात्रा को कोरोना के चलते कैंसिल कर दिया था। वहीं, राहुल गांधी तो यूपी में एक भी जनसभा नहीं कर पाए हैं। हालांकि प्रियंका ने पूरे यूपी को लगभग कवर कर लिया है।

अखिलेश यादव दो महीने से राज्य में विजय रथ यात्रा निकाल रहे हैं। यात्रा की आखिरी सभा उन्होंने 28 दिसंबर को उन्नाव में की थी। विजय यात्रा के दौरान उन्होंने 25 से ज्यादा सभाएं भी कीं। राज्य के हर इलाके को तकरीबन कवर किया है। लेकिन बड़ी जनसभाएं नहीं कर पाए हैं। हालांकि, यूपी में अखिलेश सपा की ओर से अकेले पड़ गए, क्योंकि उनके अलावा राज्य में दूसरा कोई बड़ा चेहरा नहीं है।

बसपा सुप्रीमो मायावती सबसे कम सक्रिय हैं। उन्होंने अब तक महज एक रैली और तीन बैठकें की हैं। इसके अलावा 5 बार प्रेस कॉन्फ्रेस की हैं। मायावती रैलियों के लिए चुनाव का इंतजार ही करती रह गईं। लेकिन अब कोरोना गाइडलाइन के चलते बड़ी रैली नहीं कर पाएंगी। इस बार चुनावी मैदान में उनकी सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

%d bloggers like this: