मारवाड़ी सम्मेलन ने की श्मशान भूमि में कोविड उपयुक्त व्यवहार की अपील

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी. मारवाड़ी सम्मेलन ने समाज बंधुओं से श्मशान घाट (मुक्तिधाम) में कोविड उपयुक्त व्यवहार करने की अपील की है. आज वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष ओंकारमल अग्रवाल के अंतिम संस्कार के मौके पर सम्मेलन द्वारा एक नई परंपरा शुरू करने की दिशा में पहलकदमी की गई. सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष ओमप्रकाश खंडेलवाल ने ओंकारमल जी को मुखाग्नि दिए जाने के बाद समाज के लोगों से अपील की कि वे दिवंगत के परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर मुक्तिधाम से प्रस्थान कर सकते हैं. खंडेलवाल की अपील को तार्किक जामा पहनाते हुए मारवाड़ी सम्मेलन की गुवाहाटी शाखा के अध्यक्ष सुशील गोयल और कामरूप शाखा के अध्यक्ष विनोद लोहिया ने कहा कि ऐसा करना न केवल कोविड उपयुक्त व्यवहार होगा बल्कि आज की भागमभाग भरी जिंदगी में यह एक व्यवहारिक पहल भी होगी.

उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी समाज की परंपरा के अनुसार श्मशान भूमि में जाने वाले लोग चिता के पूरी तरह जल जाने के बाद उसमें श्रद्धांजलि स्वरुप लकड़ी का टुकड़ा अर्पित कर शमशान से जाते हैं. इस पर गुवाहाटी शाखा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप भुवालका और शाखा मंत्री शंकर बिड़ला ने कहा कि चिता में लकड़ी देना महज एक लोकाचार है. यह कोई धार्मिक बाध्यता नहीं है. उन्होंने कहा कि कोलकाता सहित कई अन्य जगहों पर मुखाग्नि दिए जाने के बाद मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त कर शमशान से जाने का चलन शुरू भी हो गया है.

वैसे भी स्वर्गीय ओंकारमल अग्रवाल क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे. अपने जीवन काल में उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और घिसी-पिटी परंपराओं पर जमकर प्रहार किया था. लिहाजा उनके अंतिम संस्कार के वक्त समाज में बदलाव की दिशा में कोई सार्थक पहल होती है, तो वह भाईजी ओंकारमलजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

%d bloggers like this: