मारवाड़ी समाज के बारे में जानना बहुत जरूरी – उमेश खंडेलिया द्वारा संपादित कीर्तिमंत के विमोचन के अवसर पर बोले मिसिंग साहित्य सभा के अध्यक्ष

थर्ड आई न्यूज

धेमाजी. मैंने अपना जीवन मारवाड़ी समाज के बीच रहकर बिताया है. पर मैं यह दावे से नहीं कह सकता कि मैं इस समाज के बारे में जानता हूं. देखा जाए तो यह हमारे लिए शर्म की बात है. हमें मारवाड़ी समाज व मारवाड़ियों की जीवन शैली के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखनी चाहिए. यह बातें ज्योति दिवस के मौके पर धेमाजी जिला साहित्य सभा द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान मिसिंग साहित्य सभा के अध्यक्ष गोबीन टाइड ने कही. उल्लेखनीय है कि धेमाजी के ज्योति स्मृति भवन में विगत सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में लेखक, पत्रकार और समाजसेवी उमेश खंडेलिया द्वारा संपादित पुस्तक कीर्तिमंत का विमोचन किया गया. पुस्तक का विमोचन मिसिंग साहित्य सभा के अध्यक्ष गोबीन टाइड द्वारा किया गया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर असम के मारवाड़ी समाज का इतिहास लिखा जाता है, तो असम प्रकाशन परिषद के सदस्य के रूप में वे इसमें यथासंभव सहयोग करेंगे. गौरतलब है कि खंडेलिया की कीर्तिमंत असम के मारवाड़ी समाज के कीर्ति पुरुषों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तक है.

कल आयोजित कार्यक्रम में हरिराम खंडेलिया और गुगनराम राठी की स्मृति में दो साहित्य पुरस्कार भी प्रदान किए गए. इस गरिमामय कार्यक्रम में भारी संख्या में कला, संस्कृति और साहित्य जगत से जुड़े लोग उपस्थित थें. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कीर्तिमंत के संपादक उमेश खंडेलिया ने अपने अनुभव साझा किए .कार्यक्रम के आयोजन में धेमाजी जिला साहित्य सभा का सहयोग मारवाड़ी सम्मेलन की धेमाजी शाखा, मारवाड़ी सम्मेलन महिला समिति एवं मारवाड़ी युवा मंच धेमाजी शाखा ने किया. इस मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में ज्योति संगीत पर अपनी प्रस्तुति देकर कलाकारों ने उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया.

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