सुभाष चंद्र बोस ऑस्ट्रियाई लड़की को दे बैठे थे दिल:लवलेटर में लिखा- ‘मुझे फांसी हो या जेल, हमेशा जेहन में रहोगी, तुम्हीं मेरा प्यार

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली l देश की आजादी के लिए तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देने वाले महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस को जितना अपने देश से लगाव था, उतना ही एक ऑस्ट्रियाई लड़की से भी। ऑस्ट्रियाई लड़की एमिली शेंकल से एक इंटरव्यू के दौरान चंद मिनटों की मुलाकात में सुभाष उसे अपना दिल बैठे थे। 23 जनवरी, 1897 को कटक में जन्मे सुभाष ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। सविनय अवज्ञा आंदोलन के कुछ समय बाद ही सुभाष कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार होने लगे थे। देश का युवा सुभाष चंद्र बोस की आजादी हासिल करने के तौर-तरीकों से बेहद प्रभावित थी।

यह सुभाष का हौसला ही था, जिससे तत्कालीन ब्रिटिश सरकार भी डरती थी। सुभाष ने आजाद हिंद फौज का गठन किया, जिसे दुनिया के 9 देशों ने मान्यता भी दी थी। यहां हम बात करेंगे आजादी के लिए सख्त सुभाष के उस पहलू के बारे में, जो उनके व्यक्तित्व के काेमल पहलू को दर्शाता है।

खूबसूरत लड़की इंटरव्यू देने आई और सुभाष दे बैठे दिल :
सुभाष चंद्र बोस ने अपनी आजादी के संघर्ष को कलमबद्ध करना चाहते थे। वह दिन-रात जब वक्त मिलता खूब लिखते। ‘द इंडियन स्ट्रगल’ किताब उनकी इसी लिखने की आदत का नतीजा थी। हालांकि, अपनी इस किताब को लिखने के लिए उन्हें किसी टाइपिस्ट की जरूरत थी, जो तेजी से उनकी बातों को लिख सके। जब यह काम शुरू हुआ तो उस वक्त सुभाष ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में थे। वहां उनके एक दोस्त डॉ. माथुर ने इस काम में मदद की और दो लोगों को सुभाष के पास टाइपिस्ट की नौकरी के लिए भेज दिया। इनमें से एक थी 23 साल की खूबसूरत ऑस्ट्रियाई लड़की एमिली शेंकल, जिसे 37 साल के सुभाष पहली ही नजर में दिल दे बैठे थे। इसी दौरान दोनों के बीच प्यार पनपा।

सुभाष ने ही एमिली को किया था प्रपोज, फिर रिश्ते गहराते गए :
सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते सौगत बोस की किताब ‘हिज मैजेस्टी अपोनेंट- सुभाष चंद्र बोस एंड इंडियाज स्ट्रगल अगेंस्ट एंपायर’ में लिखा है कि सुभाष की एमिली से मुलाकात के बाद बड़ा बदलाव आया। 26 जनवरी, 1910 को ऑस्ट्रिया के एक कैथोलिक परिवार में जन्मी एमिली कहती हैं’ सुभाष ने मुझे प्रपोज किया और हमारे रिश्ते रोमांटिक होते गए। 1934 से मार्च 1936 के बीच ऑस्ट्रिया और चेकेस्लोवाकिया में रहने के दौरान हमारे रिश्तों में गहराई आनी लगी।

एमिली के पिता बेटी की पसंद पर नहीं थे राजी, सुभाष से मिले तो मुरीद हो गए :
1910 को जन्मी एमिली के पिता को शुरुआत में अपनी बेटी का किसी भारतीय के यहां काम करना बेहद नागवार गुजरा था। हालांकि, जब उनकी मुलाकात सुभाष से हुई तो वह भी उनकी पर्सनालिटी के कायल हो गए। सुभाष चंद्र बोस का व्यक्तित्व ही करिश्माई था, जो मिलता, उनका मुरीद हो जाता। सुभाष ने एमिली को कई पत्र लिखा था, जिसे एमिली ने खुद शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर कुमार बोस की पत्नी कृष्णा बोस को सौंपा था। इन्हीं पत्रों में कुछ लवलेटर भी थे, जिनसे सुभाष और एमिली के रोमांटिक रिश्ते की बात जाहिर होती है।

सुभाष ने कहा था-इस जन्म नहीं मिल पाए तो अगले जन्म में साथ रहूंगा :
सुभाष ने एमिली को 5 मार्च, 1936 को एक लेटर लिखा था, जिसमें वह कहते हैं-‘माई डार्लिंग, जैसे वक्त आने पर बर्फीला पहाड़ भी पिघल जाता है, वैसे ही मेरी भावनाएं भी हैं। …मुझे नहीं मालूम कि आने वाले समय में क्या होगा…संभव हो कि मुझे पूरी जिंदगी जेल में बितानी पड़े। मुझे गोली मार दी जाए या फांसी दे दी जाए। मैं तुम्हें कभी देख नहीं पाऊं, मगर मेरा यकीन करो, तुम हमेशा मेरे दिल में राज करोगी। मेरी सोच और मेरे सपनों में रहोगी। इस जन्म में हम नहीं मिल पाए तो अगले जन्म में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।’

साथ रहने का कर लिया फैसला, ऑस्ट्रिया में की गुपचुप शादी :
सुभाष और एमिली में प्रेम इतना गहराता गया कि दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रह पा रहे थे। सुभाष ने 1937 में एमिली को भेजे एक पत्र में लिखा था, ‘…मैं तुम्हें केवल ये बताना चाहता हूं कि जैसा मैं पहले था, वैसा ही अब भी हूं। एक भी दिन ऐसा नहीं बीता है, जब मैंने तुम्हारे बारे में नहीं सोचा था। तुम हमेशा मेरे साथ हो। मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता। इन महीनों में मैं कितना दुखी रहा, अकेलापन महसूस किया। केवल एक चीज मुझे खुश रख सकती है, लेकिन मैं नहीं जानता कि क्या ये संभव होगा।’ सुभाष जब एमिली से मिले तो दोनों ने गुपचुप शादी कर ली।

एमिली ने कृष्णा बोस को बताया था कि 26 दिसंबर, 1937 को, उनके 27वें बर्थडे पर ये शादी आस्ट्रिया के बादगास्तीन में हुई थी, जहां दोनों मिला करते थे। बाद में सांसद रहीं और शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर कुमार बोस की पत्नी कृष्णा बोस ने सुभाष और एमिली की प्रेम कहानी पर ‘ए ट्रू लव स्टोरी- एमिली एंड सुभाष’ लिख डाली।

इटली के क्रांतिकारी की पत्नी के नाम पर रखा बेटी का नाम, विमान दुर्घटना में मौत :
सुभाष और एमिली का साथ 1945 तक महज 12 साल का ही रहा। दोनों को 29 नवंबर, 1942 एक बेटी हुई, जिसका नाम दोनों ने इटली के क्रांतिकारी नेता गैरीबाल्डी की ब्राजीली मूल की पत्नी अनीता गैरीबाल्डी के सम्मान में रखा। गैरीबाल्डी की पत्नी गुरिल्ला युद्ध में माहिर थी। सुभाष अपनी बेटी को देखने के लिए दिसंबर, 1942 में वियना पहुंचे। वहां से वह अपने मिशन पर चले गए, जहां से फिर कभी लौटकर नहीं आ पाए। एमिली भी 1996 तक जिंदा रहीं और बेटी अनीता बोस को जर्मनी का मशहूर अर्थशास्त्री बनाया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 18 अगस्त, 1945 को ताइपे जाते वक्त एक विमान दुर्घटना में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत आज भी एक राज ही है।

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