गांधीजी की पुण्यतिथि:बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा बोले- मैं गांधीजी से मिल पाता तो उनके पैर छूता और पूछता कि चीन से कैसे निपटें

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली l आज महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि है। गांधीजी के निधन को इतने साल बीतने के बाद भी उनके विचार आज की कई समस्याओं का हल बन सकते हैं। इस खास दिन बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि चीन विवाद को सुलझाने में गांधीजी के विचार मददगार हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मेरे लिए महात्मा गांधी अहिंसा और करुणा के प्रतीक हैं। गांधी जी ने अपने जीवन बर्ताव से अहिंसा और करुणा दोनों सिद्धांतों का उदाहरण पेश किया। मैं उन्हें अपना गुरु और खुद को उनका एक नन्हा-सा अनुयायी मानता हूं।

बचपन में हम महात्मा गांधी के बारे में सुनते थे। पोटाला पैलेस में रहने के दौरान एक बार मैं सपने में मुस्कुराते हुए महात्मा गांधी जी से मिला। मेरी उनसे कोई बात नहीं हुई, बस मैंने उन्हें सपने में देखा।

1956 में जब मैं पहली भारत यात्रा पर आया तो मैं दिल्ली यमुना नदी के तट पर राजघाट भी गया, जहां महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था। जब मैं वहां प्रार्थना में खड़ा हुआ, तो मुझे उनसे व्यक्तिगत रूप से न मिल पाने का बहुत अफसोस हो रहा था। मेरी ख्वाहिश थी कि मैं उनसे मिलता तो पैर छूकर उन्हें प्रणाम करता और समाधान पूछता कि चीन से कैसे निपटा जाए। 1989 में ओस्लो में नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकारते हुए मैंने गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था, ‘गांधी के जीवन ने मुझे सिखाया और प्रेरित किया।’

वह अहिंसा के विचार के साथ 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति थे। उन्होंने अहिंसा और करुणा की तीन हजार साल पुरानी भारतीय परंपरा को अपनाया और इसके माध्यम से भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़कर इसे जीवंत और प्रासंगिक बना दिया। उस समय कुछ लोगों को लगा होगा कि गांधी की अहिंसा कमजोरी की निशानी थी, लेकिन कठिन परिस्थितियों में अहिंसा एक ताकत है, कमजोरी नहीं।

यदि हमारा मन भय, गुस्सा, घृणा व बदले की भावना से भरा है तो वास्तविक अहिंसा को पाना असंभव है, यानी अहिंसा हमारी आंतरिक शांति का प्रतिबिंब है। गांधी जी ने अपने व्यवहार से इसका जीवंत उदाहरण पेश किया। गांधी जी मेरे लिए एक ऐसे आदर्श राजनीतिज्ञ हैं जिन्होंने परोपकारिता में अपने विश्वास को सभी व्यक्तिगत विचारों से ऊपर रखा और सभी महान आध्यात्मिक परंपराओं के लिए लगातार सम्मान बनाए रखा।

गांधी शायद हमारे समय के सबसे महान व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत और समूची मानव जाति की भावना को बनाए रखने के लिए शांति और सद्भाव में सच्चे विश्वास को अपनी अंतिम सांस तक कायम रखा। उन्होंने अफ्रीका और अमेरिका में नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे अनुयायियों को प्रेरित किया।

आज, ऐसी दुनिया में जहां बदमाशी और हत्याएं अभी भी होती हैं, हमें पहले से कहीं अधिक करुणा और अहिंसा की जरूरत है। मैं इन आदर्शों को सर्वोत्तम आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हूं। मेरा यह भी मानना है कि भारत ही एकमात्र देश है, जिसमें अपने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की क्षमता है। अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों को बढ़ावा देना आज मेरे जीवन की मुख्य प्रतिबद्धताओं में से एक है।

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