मंदी ने दिखाना शुरू किया असर, गल्ला पट्टी का एक व्यापारी हुआ डिफॉल्टर, दुकान पर ताला जड़ हुआ फरार, कामरूप चेंबर की भूमिका पर सवालिया निशान

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी. पहले कोरोना और फिर सरकार – प्रशासन की व्यापार- वाणिज्य विरोधी नीतियों के चलते व्यापार करना दूभर होता जा रहा है. खास तौर पर छोटे और मझोले व्यापारियों को इन दिनों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले गुवाहाटी की प्रमुख मंडी गल्ला पट्टी में भी मंदी डायन ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है.

यहां के बरुआ मार्केट स्थित मैसर्स शोभाचंदका इंटरप्राइजेज के मालिक राकेश शोभाचंदका ने गत 11 जुलाई को दोपहर में अचानक अपनी दुकान पर ताला जड़ दिया. अगले दिन भी जब दुकान नहीं खुली तो लोगों ने छानबीन शुरू की और पाया कि राकेश डिफॉल्टर हो गया है. बताते हैं कि उस पर 4 से 5 करोड रुपए की देनदारी है. वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है. गल्ला पट्टी की नब्ज को पहचानने वाले बताते हैं कि राकेश शोभाचंदका इस तरह का कोई अकेला मामला नहीं है. बाजार के बहुत से व्यापारी पेमेंट क्राइसिस से गुजर रहे हैं और किसी भी समय डिफॉल्टर हो सकते हैं. इनमें कई नामचीन व्यापारियों के नाम भी शामिल होने के समाचार है.

बाजार के सूत्र यह भी बताते हैं कि गल्ला पट्टी में अब पहले वाली बात नहीं रह गई है. एक तो अधिकांश मुकाम के व्यापारी डायरेक्ट सोर्स से माल मंगाने लगे हैं. दूसरे थोक व्यापार धीरे-धीरे महानगर के आउट स्कर्ट मसलन अमिनगांव और चांगसारी जैसे इलाकों में शिफ्ट हो गया है. ऊपर से ट्रांसपोर्ट विभाग ने ट्रकों पर माल के लदान की सीमा कम कर के रही सही कसर भी पूरी कर दी. परिवहन विभाग के इस तुगलकी फरमान के बाद से ट्रांसपोर्ट खर्च इतना बढ़ गया है कि माल का पड़ता नहीं बैठ रहा है.

गल्ला पट्टी के एक पुराने व्यापारी ने बताया कि समस्याएं बहुत है. पर समाधान का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा कोई संगठन नहीं है, जिसके चलते हम अपनी बात को सरकार और प्रशासन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं. उक्त व्यापारी ने बताया कि कामरूप चेंबर ऑफ कॉमर्स कहने को तो व्यापारियों की प्रतिनिधि संस्था है, पर यह पूरी तरह निष्क्रिय है. पिछले करीब 20 वर्षों से इसके चुनाव तक नहीं हुए हैं. उन्होंने बताया कि कुछ लोग चेंबर के नाम पर अपने निहित स्वार्थों को पूरा कर रहे हैं. व्यापारियों के दुख दर्द से चेंबर ऑफ कॉमर्स को कोई लेना देना नहीं है.

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