उथल-पुथल के दौर में स्थिर है भारत की अर्थव्यवस्था, ग्लोबल ग्रोथ में योगदान सबसे ज्यादा

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली। दुनिया के विकसित देशों जैसे यूएस, यूके और इयू की अर्थव्यवस्थाओं को पिछले कुछ महीनों से भारी महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण इन देशों की अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने का खतरा बना हुआ है। दूसरी तरफ भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है। जानकार इसे भारत की उपलब्धि के तौर पर देख रहे हैं और उनका कहना है कि केंद्र सरकार की विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति के कारण आज देश में पश्चिमी देशों के मुकाबले कम महंगाई दर है और देश तेजी से विकास कर रहा है।

अमेरिकी वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टेनली ने रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2022- 23 के लिए भारत की औसत विकास दर 7 फीसदी रह सकती है, जो कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। साथ ही कहा कि एशिया में भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसके साथ ही स्ट्रक्चरल फैक्टर्स में बदलावों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज गति जारी रहेगी।

विदेशों में अधिक महंगाई की वजह :
रिपोर्ट में बताया गया कि रूस और यूक्रेन युद्ध पश्चिमी देशों में महंगाई की एक प्रमुख वजहों में से एक है, लेकिन कोरोना संकट के दौरान पश्चिमी देशों की सरकारों की ओर से दिए गए बड़े-बड़े राहत पैकेज ने भी इस महंगाई में बड़ी भूमिका निभाई है। इस यूएस के व्यक्ति को 3200 डॉलर दिए जाने, जर्मनी के राहत पैकेज और यूके के राहत पैकेज भी महंगाई की वजह है।

भारत ने विवेकपूर्ण फैसले लिए :
मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया के अलग-अलग अर्थशास्त्रियों द्वारा भारत सरकार पर दबाव बनाया गया कि अर्थव्यवस्था के कम से कम 5, 10 या 15 हिस्से का एक राहत पैकेज लाया जाए, लेकिन भारत सरकार इससे होने वाली महंगाई के असर को जानती थी और केवल उन्हीं लोगों को राहत दी गई जिन्हें बेहद जरूरत थी I

स्ट्रक्चरल फैक्टर्स में बदलाव :
मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि बीते कुछ सालों में भारत में काफी सारे स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिले हैं। सरकार की नई नीतियों के कारण देश में एक बार फिर से निजी क्षेत्र का पूंजीगत निवेश शुरू हो गया है, इससे देश की बड़े स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।

भारत के लिए चुनौती :
रिपोर्ट में कच्चा तेल एवं कमोडिटी की कीमत वृद्धि और वैश्विक अस्थिरता को भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है। हालांकि कच्चा तेल और कमोडिटी की कीमत मार्च 2022 के उच्चतम स्तर से 23-37 फीसदी तक कम हो गई है।

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