राममंदिर चंदा कोराेना वैक्सीनेशन फंड से ज्यादा: तीन लाख करोड़ की ‘टेंपल इकोनॉमी’ डिफेंस बजट के करीब, ‘मिडडे-मील’ से दोगुना 6 मंदिरों का चढ़ावा

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली l क्या आप जानते है कि राम मंदिर को मिलने वाला अब तक का चंदा कोरोना वेक्सीनेशन को इस बार मिले फंड से ज्यादा है। यही नहीं देश की टेंपल इकोनॉमी 3 लाख करोड़ के पार हो चुकी है, जो घरेलू डिफेंस बजट से कुछ ही कम है। साथ ही देश के छह मंदिरों में इतना चढ़ावा आता है जो इस बार मिड डे मील को मिले पैसों से भी दोगुना है।

ऊपरी तौर पर देखा जाए तो यह मामला किसी तरह से उलझाऊ नहीं लगता मगर जब तह तक पहुंचेंगे तो इसमें कई तरह के पेंच नजर आने लगेंगे। यही वजह है कि धार्मिक चंदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय और कई धार्मिक संगठनों ने करीब 15 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म से जुड़े पूजा स्थलों के फंड पर सरकारी कंट्रोल है, जबकि मस्जिद, मजार और चर्च सहित दूसरे धार्मिक स्थलों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसा क्यों?

इन याचिकाओं में कहा गया है कि सरकार का देश के 9 लाख मंदिरों में से 4 लाख मंदिरों पर नियंत्रण है। जबकि चर्च, मस्जिद, मजार और अन्य धार्मिक स्थलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। याचिका में मांग है कि सभी धर्मों के लिए समान धार्मिक संहिता बननी चाहिए। अब सीजेआई यूयू ललित के नेतृत्व वाली बेंच इन याचिकाओं पर 19 सितंबर यानी सोमवार को सुनवाई करेगी।

खैर, यह तो बात हुई याचिका और उसकी सुनवाई की। इन याचिकाओं में बड़ा मुद्दा धर्मस्थलों को मिलने वाला चंदा है और हम आज फुरसत में इसी की बात करेंगे।

हैरान न हों, जानें डिफेंस बजट के बराबर है ‘टेंपल इकोनॉमी’ :
अब बात करते हैं ‘टेंपल इकोनॉमी’ के बारे में। यानी मंदिर में आने वाला चंदा और मंदिर का खर्च। यह इकोनॉमी भी देश की इकोनॉमी की तरह लगातार बढ़ रही है। देश में करीब 9 लाख रजिस्टर्ड मंदिर हैं जिनमें से 4 लाख मंदिरों में दिल खोलकर चढ़ावा आता है और उससे जुड़े लोगों का घर-बार भी चलता है।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन यानी NSSO के मुताबिक, देश में ‘टेंपल इकोनॉमी’ 3.02 लाख करोड़ रुपए (40 बिलियन डॉलर) की है। इसमें फूल, तेल, घी, दीपक, चूड़ियां, सिंदूर, मूर्तियां, तस्वीरें, पोशाक समेत पूजा-अर्चना की सभी चीजें शामिल हैं। अगर देश के लिए रक्षा साजो-सामान के आयात की राशि यानी 1 लाख 52 हजार 3 सौ 69 करोड़ रुपए न शामिल की जाए तो ‘टेंपल इकोनॉमी’ देश के इस वर्ष के डिफेंस बजट (3.7 लाख करोड़ रुपए) के लगभग बराबर हो गई है।

अयोध्या के राममंदिर का चंदा कोविड वैक्सिनेशन को दी गई रकम से ज्यादा :
केंद्र सरकार ने देश में कोविड वैक्सिनेशन के लिए 5000 करोड़ रुपए दिए। इससे ज्यादा रकम राममंदिर निर्माण के लिए अब तक चंदे में मिली है। राममंदिर निर्माण के लिए राममंदिर ट्रस्ट को मिले चंदे की बात करें तो यह अब तक 5,500 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।

‘मिड डे मील’ में केंद्र सरकार के बजट से ढाई गुना ज्यादा 6 मंदिरों का चंदा :
इतना ही नहीं, यह देश के डिफेंस बजट (करीब 5,25,166 करोड़ रुपए) के 1 फीसदी से ज्यादा है। और तो और सरकारी स्कूलों में चलने वाली ‘मिड डे मील’ योजना का पूरे साल का जितना बजट केंद्र सरकार की तरफ से इस बार बना है, यह रकम उसकी आधी है।

आम बजट 2022-23 में स्कूलों में चलाए जाने वाले ‘मिड डे मिल’ कार्यक्रम में केंद्र सरकार ने 10,234 करोड़ रुपये दिए हैं। इसका करीब ढाई गुना यानी करीब 24 हजार करोड़ रुपए तो देश के महज छह बड़े मंदिरों को सालाना चंदा मिल जाता है।

ये तो हुई सालाना चंदे की बात। अब बात करते हैं मंदिरों में रखी अकूत दौलत की। इन मंदिरों के पास सोने के इतने बड़े भंडार हैं कि लगता है, ‘सोने की चिड़िया’ आज भी वहीं रहती है।

भारत सरकार के कुल स्वर्ण भंडार का छठा हिस्सा मंदिरों के पास :
हमारे देश के बारे में कहा जाता है कि हम ‘गोल्ड प्रेमी’ हैं। ये सिर्फ कहने भर की बात नहीं है, गोल्ड जूलरी के इस्तेमाल में हम पूरी दुनिया में सबसे आगे हैं। हम तो सोना पहनते, सहेजते और रखते हैं लेकिन हमारे भगवान को भी सोना बेहद पसंद है। तभी तो देश के कुल स्वर्ण भंडार का छठा हिस्सा मंदिरों में है।

‘वर्ल्ड गोल्ड कौंसिल’ की रिपोर्ट- 2020 के मुताबिक, भारत के पास 24 हजार टन स्वर्ण भंडार है, जिसमें से 4 हजार टन सोना मंदिरों में है। अब तो हर साल एक हजार टन सोना इस देश में बाहर से मंगाया जा रहा है। बाहर से आए इस सोने का बड़ा हिस्सा धर्मस्थलों पर चढ़ावे की शक्ल में जाता है।

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