पद, पावर और पैसे का नशा बना कमिश्नर राजू के पतन का कारण, सीए और टैक्स कंसल्टेंट्स से दुर्व्यवहार के चलते था काफी अलोकप्रिय

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी I जीएसटी कमिश्नर (अपील) एस वी राजू के सीबीआई की कार्रवाई के परिणाम स्वरूप गिरफ्तार होने के बाद से ही थर्ड आई न्यूज सिलसिलेवार तरीके से उसके भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और व्यापारियों पर अत्याचार की खबरें प्रकाशित करता आ रहा है. इस क्रम में आज हम कमिश्नर राजू के कुछ और काले कारनामों पर से पर्दा हटाएंगे.

यह कोई प्रयोग है या संयोग था कि जिन दिनों एस वी राजू ने कमिश्नर (अपील) के रूप में कार्यभार संभाला, उन्हीं दिनों सर्विस टैक्स विभाग ने लोगों को थोक के भाव सर्विस टैक्स के नोटिस थमाए थे. इनमें बहुत-से मझोले और छोटे व्यापारी शामिल थे. ये अधिकतर वैसे लोग हैं, जो सर्विस टैक्स के दायरे में ही नहीं आते हैं. कोरोना काल था, लिहाजा छोटे व्यापारियों ने नोटिस को इतनी तवज्जो नहीं दी. इस बीच डिमांड जारी हो गयी तो अपील की संख्या बहुत बढ़ गयी. ऐसे में अपील के लिए राजू के दरबार में हाजिर होने का मौका आया. अब जिन व्यापारियों ने डायरेक्ट जाकर या फिर अपने सीए या टैक्स कंसलटेंट के जरिए राजू को चढ़ावा चढ़ा दिया, उन्हें तो रिलीफ मिल गई. पर जो लोग कानून की दुहाई देकर अपनी बात पर अड़े रहे, उनकी शामत आ गई. उनकी सुनवाई ही नहीं हुई. उनकी अपील रद्द की जानी लगी. जबकि उसमें से कई लोग कानूनन न्याय के हकदार थे. पर पावर और ऊंची पहुंच के नशे में चूर कमिश्नर राजू ने कानून की परवाह कब की थी, जो अब करता. बेचारे छोटे-मझोले व्यापारियों को अब कोलकाता स्थित जीएसटी ट्रिब्यूनल के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जो उनके बूते के बाहर की बात है.

यहां यह बात दीगर है कि कमिश्नर राजू ने ऐसे लोगों को रिलीफ दी जो इसके लिए एलिजिबल नहीं थे ,वहीं न्याय के कई उपयुक्त पात्र वंचित कर दिये गए. जिन व्यापारियों ने या उनके सीए और टैक्स कंसलटेंट ने उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया, उन्हे राजू का प्रकोप झेलना पड़ा.

उधर, कुछ ‘समझदार’ व्यापारियों ने राजू के दोस्त दाते के मार्फत या फिर अपने सीए या टैक्स कंसलटेंट के जरिए सेटिंग कर सर्विस टैक्स में ऐसी राहत ले ली, जिसके वे हकदार नहीं थे. इस क्रम में सरकारी खजाने को चपत लगे तो लगे. राजू और उसके सहयोगियों ने अपने खजाने तो भर ही लिए. पर कहावत है ना कि पाप का घड़ा एक न एक दिन भरता ही है. अब ये बंदरबांट करने वाले यानी राजेंद्र दाते,कुछ सीए और टैक्स कंसलटेंट सीबीआई के रेडार पर है. इन पर कभी भी गाज गिर सकती है.

ओहदे से मिली ताकत, अनैतिक तरीके से कमाया गया पैसा और ऊंची पहुंच का नशा जीएसटी विभाग के कमिश्नर (अपील) एस वी राजू के सिर चढ़कर बोल रहा था. भ्रष्टाचार के आरोप तो उस पर गाहे-बगाहे लगते ही रहे हैं. उसके काम करने के तौर-तरीके भी विवादों में रहे हैं. और फिर गुवाहाटी में कमिश्नर (अपील) की कुर्सी पर बैठने के बाद तो वह पूरी तरह निरंकुश हो गया. व्यापारियों की बात तो एक और सीए व टैक्स कंसल्टेंट्स के साथ भी उसका व्यवहार किसी तानाशाह की तरह था. हियरिंग के दौरान वह सीए और टैक्स कंसल्टेंट्स के साथ दुर्व्यवहार किया करता था. दरअसल कमिश्नर राजू चाहता ही नहीं था कि कोई सीए या टैक्स कंसलटेंट उसके दफ्तर में आकर किसी केस की पैरवी करें. वह उन्हें बेमतलब का बिचौलिया समझता था. वह डायरेक्ट पार्टियों से मिलकर ले-देकर मामले को रफा-दफा करने में यकीन रखता था. इस काम में उसका शागिर्द राजेंद्र दाते उसकी भरपूर मदद किया करता था. वह पार्टियों को फोन करके जीएसटी ऑफिस बुलाता और फिर वहां से उन्हें केदार रोड स्थित एक होटल में ले जाकर खुलेआम उनसे मोलभाव करता था. वह व्यापारियों को धमकाता भी था कि अगर सीए और टैक्स कंसलटेंट के मार्फत अपील में जाओगे तो महंगा पड़ेगा और कोई रिलीफ भी नहीं मिलेगी. दिलचस्प बात यह है कि दाते उपाधिधारी यह व्यक्ति जीएसटी विभाग का कर्मचारी नहीं है. इसके बावजूद वह केदार रोड के जीएसटी भवन के गेस्ट हाउस में महीनों से शान से रह रहा था और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाता था.

एक सीए ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि किसी भी केस की हियरिंग के वक्त राजेंद्र दाते कमिश्नर राजू के चेंबर में सोफे पर बैठा रहता था. कोई सीए या टैक्स कंसलटेंट उसकी अवांछित मौजूदगी पर असहज महसूस करता तो राजू कह दिया करता था कि आप अपनी बात जारी रखें, वह अपना ही आदमी है. उक्त सीए ने बताया कि अपने कुछ चहेते चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स कंसल्टेंट्स के अलावा वह अन्य सभी प्रैक्टिसनरों से चिढ़ता था. उसकी खीज का आलम यह था कि वह सीए और टैक्स कंसल्टेंट्स को अपने चेंबर के बाहर दो-तीन घंटे तक इंतजार करवा दिया करता था. उक्त सीए ने राजू की एक और दिलचस्प करतूत बताई. आमतौर पर इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) ऑफिसर के सामने बैठकर चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसल्टेंट्स अपने क्लाइंट के पक्ष में दलील देते हैं. पर कमिश्नर राजू तो खुद को किसी हाकिम से कम नहीं समझता था. लिहाजा उसने अपने चेंबर में एक पोडियम लगा दिया. सीए व टैक्स कंसलटेंट उस पोडियम के पीछे खड़े होकर अपनी बात कहते थे. दरअसल यह अप्रत्याशित है. केवल न्यायपालिका के सामने ही खड़े होकर बोलने की परंपरा है. पर पद और पावर के नशे में चूर राजू ने परंपराओं की परवाह कब की थी.

बहरहाल ,कमिश्नर राजू 5 दिनों के सीबीआई रिमांड पर है. उससे मैराथन पूछताछ जारी है. हो सकता है कि मैनेज करने की अपनी कला के चलते वह सीबीआई के शिकंजे से बच निकले (जिसकी संभावना कम ही नजर आ रही है), पर इतना तो तय है कि अपने कैरियर के आखिरी पड़ाव पर उस पर एक बदनुमा दाग तो लग ही गया.

%d bloggers like this: