Tribal Movement: झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा व असम में 30 नवंबर को रेलवे ट्रैक होगा ठप

थर्ड आई न्यूज

रांची । आदिवासियों के लिए जनगणना में सरना धर्म कोड को शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही है। मंगलवार को रांची में इसके समर्थन में आदिवासी सेंगेल अभियान ने धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। बापू वाटिका में बड़ी संख्या में आदिवासियों ने इस कार्यक्रम में भागीदारी की। आदिवासी सेंगेल अभियान के प्रमुख सह भाजपा के पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने दावा किया कि इस दौरान पांच राज्यों से आए आदिवासी समुदाय के लोगों की कार्यक्रम में भागीदारी रही।

राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा :
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को मांग पत्र समर्पित किया गया। कार्यक्रम में शामिल आदिवासी समुदाय के लोग हाथों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर लिए हुए थे। सालखन मुर्मू ने कहा कि हमें देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है। जनगणना में सरना धर्म कोड हमारी धार्मिक आजादी होगी। इसे अविलंब मान्यता देकर जनगणना में आदिवासी समुदाय को शामिल होने का सौभाग्य प्रदान करें। यह हमारा संवैधानिक व मौलिक अधिकार भी है।

हम मूर्ति पूजक नहीं, हमारे यहां वर्ण व्यवस्था नहीं :
उन्होंने कहा कि आदिवासियों के लिए प्रकृति पालनहार है, ईश्वर है। हमारे पूजा-पाठ, सोच संस्कार, रीति रिवाज, पर्व त्योहार प्रकृति के साथ अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। हम मूर्ति पूजक नहीं हैं। हमारे बीच वर्ण व्यवस्था और स्वर्ग- नरक आदि की अवधारणा भी नहीं है। यह हमारे अस्तित्व, पहचान और हिस्सेदारी का भी मामला है। देश में अनुच्छेद -25 के तहत अविलंब धार्मिक आजादी मिले। सरना धर्म की मान्यता से प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण में भी सहयोग मिलेगा।

जैन-बौद्ध को मान्यता तो आदिवासी को क्यों नहीं :
आदिवासियों ने 2011 की जनगणना में लगभग 50 लाख की संख्या में “एनी अदर कालम” में सरना धर्म दर्ज कराया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जैन और बौद्ध धर्म को मान्यता दी जा सकती है, तो हमें क्यों नहीं मान्यता दी जा रही है। जो आदिवासी प्रकृति पूजा – सरना धर्म से दूर दूसरे धर्मों को भटक गए हैं, उनसे भी आग्रह है कि वे अपनी प्रकृति पूजा के मूल धर्म में वापस लौटें।

चार नवंबर को गुवाहाटी में करेंगे जोरदार प्रदर्शन :
अगर केंद्र सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो 30 नवंबर को आदिवासी समुदाय के लोग झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिशा और असम में रेलवे ट्रैक जाम करेंगे। इससे पहले सरना धर्म कोड की मान्यता को लेकर 20 सितंबर को भुवनेश्वर और 30 सितंबर को कोलकाता में धरना-प्रदर्शन हो चुका है। चार नवंबर को गुवाहाटी में प्रदर्शन करने का निर्णय किया गया है।

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