चार दशक पुराना नियम बदलकर तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति चुने गए शी जिनपिंग, माओ के रिकॉर्ड की बराबरी की

थर्ड आई न्यूज

बीजिंग I चीन की कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के 20वें अधिवेशन के समापन के ठीक बाद शी जिनपिंग को एक बार फिर राष्ट्रपति चुन लिया गया है। उम्मीद के मुताबिक, उन्हें लगातार तीसरी बार पार्टी का महासचिव चुना गया है। पार्टी संस्थापक माओ जेदोंग के बाद वह ऐसे पहले चीनी नेता हैं, जिन्हें इस पद पर तीसरे कार्यकाल के लिए चुना गया है। चीन में इस पद पर चुने जाने वाला नेता ही देश का राष्ट्रपति और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का कमांडर भी रहता है।

जिनपिंग के वर्चस्व से बदला पार्टी का चार दशक पुराना नियम :
जिनपिंग के तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने के साथ ही पार्टी का चार दशक पुराना नियम भी टूट गया है। दरअसल, चीन में 1982 में सर्वोच्च पद पर 10 साल के कार्यकाल का नियम बनाया गया था। हालांकि, जिनपिंग को पांच और वर्षों तक सत्ता में रखने के लिए इस नियम को किनारे कर दिया गया।

पोलित ब्यूरो करता है राष्ट्रपति पर फैसला :
जिनपिंग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के भी सदस्य हैं। इस 25 सदस्यीय ‘पोलित ब्यूरो’ ने ही चुनाव के आधार पर ही चीन में शासन करने के लिए स्थायी समिति के सात या इससे अधिक सदस्यों का चुनाव किया। इस समिति की ओर से ही पार्टी महासचिव के तौर पर जिनपिंग का भी चुनाव हुआ। उन्हें अगले पांच साल के लिए पार्टी और देश के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पोलित ब्यूरो से गायब रहे कई अहम नेताओं के नाम :
गौरतलब है कि केंद्रीय समिति के सदस्यों की सूची में कई नेताओं के नाम हटवा दिए गए थे। इनमें प्रधानमंत्री ली क्विंग (67), नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के अध्यक्ष ली झांशु (72), चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष वांग यांग (67), पूर्व उप प्रधानमंत्री हान झेंग (67) शामिल हैं। ये सभी नेता निवर्तमान सात सदस्यीय स्थायी समिति के सदस्य थे, जिसके अध्यक्ष शी जिनपिंग हैं।

जिनपिंग के नाम जुड़ा रिकॉर्ड :
जिनपिंग इस साल सीपीसी प्रमुख और राष्ट्रपति के तौर पर अपना 10 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। पार्टी संस्थापक माओत्से तुंग के बाद वह पहले चीनी नेता बन गए हैं, जो सत्ता में तीसरे कार्यकाल तक कायम रहेंगे। माओत्से तुंग ने करीब तीन दशक तक चीन पर शासन किया था। जानकारों का मानना है कि नया कार्यकाल मिलने का सीधा मतलब यह है कि जिनपिंग भी माओ की तरह जीवनपर्यंत सत्ता में बने रहने की मंशा रखते हैं।

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