एक साल की तैयारी, नतीजा शर्मनाक हार:4 कप्तान और 30 खिलाड़ी बदले…सब एक्सपेरिमेंट फेल

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों मिली हार के बाद भारत टी-20 वर्ल्ड कप 2022 से बाहर हो गया। 169 रन के टारगेट का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने बिना विकेट खोए 170 रन बना लिए। टीम इंडिया एक बार फिर बड़े टूर्नामेंट में चोक कर गई। उसे ट्रॉफी जीते बिना ही लौटना पड़ा।

ICC के इस बड़े टूर्नामेंट में हार के क्या कारण रहे? 2021 टी-20 वर्ल्ड कप के पहले मैच में पाकिस्तान से 10 विकेट की हार से लेकर इस वर्ल्ड कप में इंग्लैंड से भी 10 विकेट की हार तक, टीम इंडिया ने कितने एक्सपेरिमेंट किए और बड़े टूर्नामेंट में पिछली ट्रॉफी जीतने के बाद किन-किन टूर्नामेंट ने टीम इंडिया ने अब तक चोक किया।

2021 में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में क्या थे हालात?
17 अक्टूबर से 14 नवंबर 2021 तक UAE में पिछले साल का टी-20 वर्ल्ड कप खेला गया। इस टूर्नामेंट के पहले मैच में पाकिस्तान ने भारत को हराया। भारत से मिले 152 रन के टारगेट को पाकिस्तान ने बिना विकेट गंवाए हासिल कर लिया था। दूसरे मैच में हम न्यूजीलैंड से हार गए। इसके बाद 3 लीग मैच जीतकर भी सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सके थे।

2021 वर्ल्ड कप के बाद 30 प्लेयर्स आजमाए :
2021 वर्ल्ड कप के बाद विराट कोहली की जगह रोहित शर्मा टी-20 समेत तीनों फॉर्मेट में कप्तान बनाए गए। रवि शास्त्री की जगह राहुल द्रविड़ हेड कोच हो गए। 15 नवंबर 2021 से 15 अक्टूबर 2022 तक 11 महीने में टीम इंडिया ने 35 टी-20 मैच खेले। इनमें 30 खिलाड़ियों को आजमाया। 7 ने डेब्यू किया। बाकी सब तो छोड़िए हमने इस दौरान 4 कप्तान भी बदल दिए।

इतने एक्सपेरिमेंट के बाद टी-20 वर्ल्ड कप के लिए 15 खिलाड़ियों की टीम तय हुई, लेकिन ये टॉप-15 खिलाड़ी मिलकर भी भारत को ICC ट्रॉफी नहीं जिता सके।

पूर्व वर्ल्ड कप में टॉप ऑर्डर फेल रहा
इस वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा और लोकेश राहुल की ओपनिंग जोड़ी फ्लॉप रही। कितनी हैरानी की बात है कि 6 मैच में एक भी बार यह जोड़ी 50 रन की पार्टनरशिप नहीं कर सकी। पिछले वर्ल्ड कप के बाद भारत ने ईशान किशन, रितुराज गायकवाड़, संजू सैमसन और दीपक हुड्डा तक से ओपनिंग कराई, लेकिन आखिर में रोहित और राहुल की जोड़ी पर ही भरोसा किया। ये भी कुछ नहीं कर सके।

प्लेइंग-11 में लेग स्पिनर क्यों नहीं?
टी-20 फॉर्मेट में रिस्ट स्पिनर विकेट टेकिंग ऑप्शन माने जाते हैं। भारत ने इस वर्ल्ड कप से पहले 35 मैच में कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई और युजवेंद्र चहल की रिस्ट स्पिन को ट्राई किया। वर्ल्ड कप स्क्वाड में अक्षर पटेल की लेफ्ट आर्म स्पिन, रविचंद्रन अश्विन की ऑफ स्पिन के अलावा चहल की लेग स्पिन गेंदबाजी को चुना भी गया।

लेकिन टूर्नामेंट के 6 मैच जब हुए तो प्लेइंग-11 में चहल को मौका ही नहीं मिला। अश्विन और अक्षर को सभी मैच खिलाए गए। अश्विन ने 6 मैच में 6 विकेट तो अक्षर ने 5 मैच में 3 ही विकेट लिए। इसका असर ये हुआ कि जसप्रीत बुमराह की गैर मौजूदगी में तेज गेंदबाजों पर विकेट लेने का दबाव आया। तेज गेंदबाजों ने पावरप्ले और डेथ ओवर्स में विकेट भी लिए, लेकिन 7 से 15 ओवर के बीच टीम को विकेट नहीं मिल सके।

टीम इंडिया में खिलाड़ी कम, कप्तान ज्यादा :
टीम इंडिया ने एक ही साल के अंदर टी-20 में 4 और सभी फॉर्मेट में 8 खिलाड़ियों से कप्तानी कराई। टी-20 में रोहित शर्मा के अलावा ऋषभ पंत, केएल राहुल और हार्दिक पंड्या को भी कप्तानी दी गई। फ्यूचर कैप्टन डेवलप करने के हिसाब से टीम मैनेजमेंट का यह फैसला ठीक था, लेकिन इस फैसले के चलते वर्ल्ड कप की टीम में पंत, राहुल, पंड्या, रोहित और पूर्व कप्तान विराट कोहली समेत 5 इंटरनेशनल कप्तान खेल रहे थे।

वर्ल्ड कप के लिए खराब स्क्वॉड का सिलेक्शन :
वर्ल्ड कप से पहले के 35 मैचों में भारत ने ईशान किशन, संजू सैमसन, दिनेश कार्तिक, ऋषभ पंत और लोकेश राहुल से विकेट कीपिंग कराई। आखिर में टीम ने कार्तिक की फिनिशिंग स्किल्स पर भरोसा जताया। स्क्वाड में पंत को बैकअप कीपर के रूप में रखा गया। राहुल से केवल ओपनिंग कराई गई।

कार्तिक ने शुरू के 4 मैच खेले और 14 रन बनाए। पंत ने आखिर के 2 मैच खेले। वह भी इनमें 9 रन ही बना सके। भारत आखिर तक तय नहीं कर पाया कि कीपर के रूप में पंत को खिलाए या कार्तिक को।

इतने एक्सपेरिमेंट क्यों?
टीम मैनेजमेंट ने कप्तानों और खिलाड़ियों के ये एक्सपेरिमेंट वर्क लोड को देखते हुए किए। मैनेजमेंट का मानना था कि टीम बहुत ज्यादा मैच खेलती है। ऐसे में किसी एक खिलाड़ी पर ज्यादा दबाव न आए, इसलिए ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को मौके दिए गए।

इस मैनेजमेंट के बावजूद वर्ल्ड कप से ठीक पहले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑल राउंडर रवींद्र जडेजा चोट के चलते टूर्नामेंट नहीं खेल सके। वहीं, डेथ और मिडिल ओवर्स में विकेट लेने के स्पेशलिस्ट माने जाने वाले हर्षल पटेल को टीम ने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खिलाया। फिर पता नहीं क्यों टीम ने इतने एक्सपेरिमेंट कर लिए?

रोहित भी एक्सपेरिमेंट के फेवर में :
कप्तान रोहित शर्मा का कहना था कि वे वर्ल्ड कप से पहले अपनी बेस्ट टीम खोज रहे हैं। इसलिए उन्होंने कई सारे प्लेयर्स को ट्राई किया। हालांकि टीम इंडिया आखिर तक एक्सपेरिमेंट ही करती रह गई। टूर्नामेंट निकल गया और हम एक तरह से बिना लड़े हारकर घर वापसी कर रहे हैं।

2014 से लगातार नॉकआउट मैच हारे :
टीम इंडिया ने आखिरी टी-20 वर्ल्ड कप 2007, आखिरी वनडे वर्ल्ड कप 2011 और आखिरी चैंपियंस ट्रॉफी 2013 में जीती। 2013 के बाद भारत ने ICC के 8 मेगा टूर्नामेंट में 10 नॉक आउट मुकाबले खेले। इनमें 7 हारे और 3 जीते। इनमें भी 2 बार टीम ने बांग्लादेश को हराया।

वहीं, एक बार 2014 टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को हराया, लेकिन फाइनल में श्रीलंका से हार गए। इससे पहले भारत ने 2015 के क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश को हराया, लेकिन सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गए। फिर 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में भी बांग्लादेश को ही हराया, लेकिन फाइनल में पाकिस्तान से हार गए।

इस तरह 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीत के बाद से भारत ICC के किसी भी बड़े टूर्नामेंट की ट्रॉफी नहीं उठा सका। टीम को 7 बार जिन टीमों ने हराया। उनमें श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड शामिल हैं। न्यूजीलैंड ने तो इस दौरान 2 बार हमें नॉक आउट मुकाबले में हराया। पहले 2019 वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में और फिर 2021 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भी मात दी।

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