दुनियाभर में प्रवासी भारतीयों की सॉफ्ट पावर:अमेरिकी सरकार व्हाइट हाउस में मनाती है दिवाली, मुस्लिम देश UAE में बना करोड़ों का मंदिर

थर्ड आई न्यूज

नई दिल्ली। प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर दुनियाभर से भारतीय मूल के लोग मध्य प्रदेश के इंदौर पहुंचे हैं। UN इंटरनेशनल माइग्रेशन रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में करीब 1.80 करोड़ प्रवासी भारतीय हैं। इनमें से करीब 70% अमेरिका, UAE, सऊदी अरब, मलेशिया, ब्रिटेन, कनाडा और श्रीलंका में हैं।

प्रवासियों ने 2021 में 87 अरब डॉलर (करीब 6.5 लाख करोड़ रु.) भारत भेजे। यह रकम 2020 से 4.6% ज्यादा है। ये आंकड़े प्रवासी भारतीयों की आर्थिक ताकत बताते हैं, लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष प्रवासी भारतीयों का ‘सॉफ्ट पावर’ है। इसके चलते ही व्हाइट हाउस में दिवाली सेलिब्रेशन होता है, तो यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यानी UAE में करोड़ों रुपए का हिंदू मंदिर बनकर तैयार है।

प्रवासियों का मतलब ब्रेन ड्रेन नहीं ब्रेन गेन:
प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की शुरुआत 2003 में हुई थी। इसके लिए लक्ष्मीमल सिंघवी समिति ने सिफारिश की थी। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था- हम ब्रेन ड्रेन को अब ब्रेन गेन में बदलने के रास्ते पर चल रहे हैं। हम चाहते हैं कि दूसरे देशों में रह रहे भारतीयों को ‘अधिकतम सुविधा’ और ‘न्यूनतम असुविधा’ मिले। इससे देश को फायदा होगा।

इसका असर भी देखने को मिला। वक्त के साथ प्रवासी भारतीय हर तरह से मजबूत होते चले गए। आज अमेरिका और यूरोप से लेकर गल्फ कंट्रीज तक उनकी ताकत देखी जा सकती है। अमेरिका में लॉबीइंग का मामला हो या इंडोनेशिया में कल्चरल एंगेजमेंट, आपको प्रवासी भारतीयों की मौजूदगी हर जगह मिलेगी। हाल ही में जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों को संबोधित करते हुए इसका जिक्र भी किया था।

अमेरिका में प्रेसिडेंट जो बाइडेन के एडमिनिस्ट्रेशन को ही देख लें। उनके एडमिनिस्ट्रेशन में 80 से ज्यादा भारतवंशी अहम पदों पर तैनात हैं। यही हालात ब्रिटेन और कनाडा के भी हैं।

UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए प्रवासी अहम:
आबादी के लिहाज से भारत इस वक्त दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारी जनसंख्या करीब 1 अरब 30 करोड़ है और इस मामले में सिर्फ चीन हमसे आगे है। एक अनुमान के मुताबिक, अप्रैल 2023 में भारत आबादी के लिहाज से चीन को पीछे छोड़ देगा।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और आबादी के लिहाज से दूसरे नंबर पर आने वाला भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थायी सदस्य नहीं है। चीन वहां मौजूद है और किसी भी कीमत पर भारत को इस क्लब में शामिल नहीं होने देना चाहता।

प्रवासी भारतीयों की ताकत और लॉबीइंग भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल करने में अहम भूमिका निभा सकती है। अमेरिका और दूसरे वेस्टर्न कंट्रीज में ये लोग जबरदस्त कोशिश भी कर रहे हैं। उम्मीद है उन्हें जल्द कामयाबी मिलेगी, क्योंकि दुनिया भी भारत के साथ खड़ी है।

UNSC में पांच देश हैं। ये हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन। इनमें से सिर्फ चीन ऐसा है जो भारत को इस क्लब में शामिल करने के खिलाफ है। बाकी चारों देश हमारे साथ हैं। जाहिर है देर सवेर चीन को भी दुनिया के दबाव के सामने झुकना पड़ेगा।

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