मेघालय में जुदा होती भाजपा-एनपीपी की राहें, अपने दम पर चुनाव लड़ेंगी पार्टी

थर्ड आई न्यूज

गुवाहाटी । मेघालय में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है लेकिन दो पुराने सहयोगियों के संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। दरअसल, कई पुलिस शिकायतों और अंत में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बर्नार्ड मारक की पिछले साल गिरफ्तारी ने एनपीपी के साथ संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया। दोनों गठबंधन सहयोगियों ने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। कॉनराड संगमा की पार्टी ने 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव को लेकर 58 उम्मीदवारों की पहले ही घोषणा कर दी है, जबकि भाजपा ने अभी तक उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप नहीं दिया है।

घर से बरामद हुए हथियार :
गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य मारक पर अपने फार्महाउस में वेश्यालय चलाने का आरोप लगा था। पुलिस के मुताबिक, उसके घर से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया। भाजपा नेता पर अपने फार्महाउस में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म करने का आरोप भी लगा था। वह फरार थे और बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में मारक को तीन महीने जेल में बिताने के बाद कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्होंने साजिश का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी के पीछे मुख्यमंत्री का हाथ बताया है।

संगमा के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव :
मारक ने कॉनराड संगमा के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया। जिसकी वजह से एनपीपी और भाजपा के बीच तनाव और भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है। हालांकि सिर्फ मारक की वजह से एनपीपी और भाजपा के बीच मतभेद उभकर सामने नहीं आए बल्कि कई अन्य मुद्दों के लेकर भी खींचतान देखने को मिली है। समान नागरिक संहिता और मुकरोह गांव की गोलीबारी ने सहयोगियों के बीच सेंधमारी का काम किया। बता दें कि मुकरोह गोलीबारी में पांच नागरिकों की मौत हुई थी।

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को उम्मीद थी कि वो अच्छी संख्या में सीटें जीतेगी लेकिन नतीजे इसके उलट रहे। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, तत्कालीन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने चुनाव अभियान में हिस्सा लिया था।

राज्य के कई प्रमुख नेता भाजपा में शामिल:
भगवा खेमे का मानना है कि एनपीपी और तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के आने से भी उनका जनाधार मजबूत हुआ है और कई प्रमुख नेता भी पार्टी में शामिल हुए हैं। पार्टी के भीतर ऐसा अनुमान लगाया गया कि भाजपा गारो हिल्स इलाके में कम से कम 5 सीटें जीत सकती है। लेकिन सवाल यही खड़ा होता है कि भाजपा क्या अपने दम पर सरकार बना सकती है? क्योंकि साल 2018 में 20 सीटें जीतने वाली एनपीपी ने भाजपा, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) और हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के सहयोग से सरकार बनाई थी। बता दें कि यूडीपी और एचएसपीडीपी भी कॉनराड संगमा की पार्टी के साथ गठबंधन किए बिना चुनाव लड़ रहे हैं। यूडीपी ने एचएसपीडीपी के कई नेताओं को अपने पाले में शामिल कर लिया था। जिसकी वजह से एचएसपीडीपी का वोटबैंक काफी प्रभावित हुआ।

इतने सीटों पर चुनाव लड़ सकती है भाजपा :
माना जा रहा है कि भाजपा और यूडीपी दोनों ही पार्टियों सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारेंगी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी करीब 20 से 25 सीटों पर उम्मीदवारों को खड़ा कर सकती है। जबकि यूडीपी का इससे भी कम सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद है।

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