कांग्रेस सांसद ने गौहाटी HC के सीजे से महामारी के बीच बेदखली अभियानों का स्वतः संज्ञान का आग्रह

suo motu cognizance

गुवाहाटी: कांग्रेस सांसद अब्दुल खालेक ने बुधवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अपील की कि वे महामारी के बीच अदालत के आदेश का उल्लंघन करते हुए असम के दो जिलों (सोनितपुर और होजय) में 95 परिवारों को हाल ही में बेदखल करने पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील करें।

लोकसभा सांसद ने दावा किया कि सोनितपुर और होजाई दोनों जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर क्रमश 17 मई और 6 जून को जामूगुरिहाट (सोनितपुर) और काकी (होजाई) में बेदखली अभियान चलाया है।

लोकसभा सांसद ने इसी मुद्दे पर 7 जून को गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था जिसे बाद में उन्होंने बुधवार को अपने ट्विटर हैंडल पर अपलोड कर दिया।

“मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली माननीय गौहाटी उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ को देखते हुए COVID-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए 10-05.2021 के अपने आदेश के माध्यम से यह आदेश दिया गया है कि बेदखली/निपटान या विध्वंस के लिए कोई भी डिक्री स्थगित रहना चाहिए । लेकिन हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए सोनितपुर और होजई जिला प्रशासन ने जामूगुरिहाट और काकी में बेदखली अभियान चलाया।” उन्होंने ट्वीट किया, “मैं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करता हूं कि वे प्रभावित लोगों के आश्रय के मौलिक अधिकार को बहाल करने के लिए स्वो मोटो कार्यवाही शुरू करें ।”

विशेष रूप से सांसद खलीक ने अपने पत्र में काकी (लंका) में जामूगुरिहाट और होजाई जिला प्रशासन में सोनितपुर जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए बेदखली अभियान में प्रभावित लोगों की शरण के मौलिक अधिकार की बहाली के लिए 7 जून को गौहाटी उच्च न्यायालय के सीजे के समक्ष प्रार्थना की थी ।

उन्होंने लिखा, “जामूगुरिहाट में बेदखली अभियान, जिसने 25 परिवारों को बेघर कर दिया, और काकी (लंका) में, जिसने ७० परिवारों को बेघर कर दिया, इन लोगों के आश्रय के अधिकार पर सीधा हमला है । आश्रय का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में रखा गया है ।”

सांसद ने आगे कहा कि सोनितपुर और होजाई के जिला प्रशासनों द्वारा की गई कार्रवाई मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के अनुच्छेद २५.१ का उल्लंघन करती है जिसमें कहा गया है कि सभी को आवास का अधिकार है ।

पत्र में कहा गया है, “सोनितपुर और होजाई जिला प्रशासन की ये कार्रवाई इस उग्र महामारी के दौरान हुई जो और भी शर्मनाक और अस्वीकार्य है ।”

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