Dipak Agarwal Rice Scam: पल्ला झाड़ रही है मेघालय सरकार, CM ने कहा मेघालय PDS से कोई लेना देना नहीं

असम पुलिस ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) मेघालय इकाई से संबंधित अनाज की एक लाख बोरियां जब्त कर सरकारी चावल की आपूर्ति से जुड़े घोटाले का भंडाफोड़ करने का दावा किया है।

थर्ड आई न्यूज़डेस्क, शिलांग, 14 जून: मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने सोमवार को कहा कि असम में एक गोदाम से चावल की जब्ती का सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) या COVID राहत से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन यह “समाज कल्याण विभाग के लिए” था ।

“इसका पीडीएस से कोई लेना-देना नहीं है, (मेघालय को) दिए गए COVID राहत से कोई लेना-देना नहीं है… संगमा ने संवाददाताओं से कहा, यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) या पीडीएस प्रणाली का हिस्सा नहीं है क्योंकि चावल मई और जून महीने के लिए पहले ही प्राप्त हो चुका है और पहले से ही हमारे गोदामों (वितरण के लिए) में है ।

वह असम में एक गोदाम से भारी मात्रा में चावल जब्त किए जाने के बाद कई हलकों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे ।

संगमा ने कहा कि असम के गोदाम में एनएफएसए चावल होने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि ऐसा कोई टैग नहीं है जो कहता हो कि यह मेघालय के लिए निर्धारित चावल है।

“एनएफएसए चावल जो वितरण के लिए है पहले से ही प्राप्त किया गया है ।” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया, “एनएफएसए चावल या सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए बने चावल होने का कोई सवाल ही नहीं है, जो रिपोर्ट आई है, उससे बड़ी गलती या गलतफहमी हुई है ।”

संगमा ने कहा कि जब्त किए गए चावल की मात्रा राज्यों की मासिक आवश्यकता का लगभग आधा है और राज्यों के गोदामों से भारी मात्रा में गायब होना निश्चित रूप से देखा गया होगा ।

मुख्यमंत्री ने एक मौखिक रिपोर्ट के अनुसार चावल समाज कल्याण विभाग के लिए बने थे और वह इस मामले पर लिखित रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

जब्त चावल को भारतीय खाद्य निगम शिलांग द्वारा समाज कल्याण विभाग के माध्यम से कॉन्टिनेंटल मिल्ककोज लिमिटेड को आवंटित करने का दावा किया गया है।

असम पुलिस ने कामरूप जिले के बोको में एक निजी गोदाम से भारतीय खाद्य निगम की मेघालय इकाई से संबंधित अनाज की एक लाख बोरियां जब्त कर सरकारी चावल की आपूर्ति से जुड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया था जबकि खाद्य पदार्थ को बेचने के लिए रिपैक किया जा रहा था ।

सोमवार को जारी बयान में समाज कल्याण निदेशक डीडी शिरा ने कहा कि विभाग जांच के लिए असम सरकार के जांच अधिकारी के आधिकारिक पत्र और आपूर्तिकर्ता के खिलाफ आगे उचित कार्रवाई का इंतजार कर रहा है ।

उनके अनुसार भारत सरकार गेहूं आधारित पोषण कार्यक्रम (डब्ल्यूबीएनपी) के तहत चावल विभिन्न राज्यों को आवंटित करती है।

उन्होंने कहा कि बदले में समाज कल्याण निदेशालय ने अनुमोदित निर्माता को चावल आवंटित कर दिया जिसे एफसीआई गोदाम से उठाया गया था ।

शिरा ने कहा, ‘”इसके बाद निर्माता इसे कई तरह के रेडी टू ईट फोर्टिफाइड फूड प्रोडक्ट्स में प्रोसेस करता है, जिसे न्यूट्रिशन प्रोग्राम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई किया जाता है।”

निदेशक ने आगे दावा किया कि अभी तक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति न होने का कोई उदाहरण नहीं मिला है, और पूरी इंपोर्टेड मात्रा मिली है ।

बोको पुलिस प्रभारी संजीत रॉय और छगन सर्कल अधिकारी जयंता बोरा की एक टीम ने एक ट्रक को जब्त किया और चालक और अप्रेंटिस से पूछताछ की, जिसके चलते उन्हें निजी कंपनी के गोदाम में हो रही भारी अनियमितताओं का पता लगाना पड़ा । यह पाया गया कि मारुति क्वालिटी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एमक्यूपीपीएल) के रूप में पहचानी जाने वाली कंपनी का एक अग्रणी बहुराष्ट्रीय खाद्य कंपनी के साथ टाई-अप है और उनकी भूमिकाओं की जांच की जा रही है ।

एमक्यूपीपीएल और उसके गोदाम का मालिकाना हक एक दीपक अग्रवाल के पास है, जो फरार है और पुलिस और नागरिक प्रशासन द्वारा संयुक्त जांच की जा रही है ।

लेकिन MQPPL के बारे में इंटरनेट पर जो जानकारी पाई गई उसमे दीपक अग्रवाल के बजाय कौस्तुभि, ध्रुव गुप्ता, और प्रभा अग्रवाल इसके निर्देशक हैं।

Link about company : https://www.zaubacorp.com/company/MARUTII-QUALITY-PRODUCTS-PRIVATE-LIMITED/U25200AS2008PTC008623

तो सवाल उठता है की आखिर दीपक अग्रवाल का नाम कैसे आ रहा है, कौन है ये दीपक अग्रवाल और इस कंपनी में दीपक अग्रवाल की क्या भूमिका है? क्या केवल गोदाम दीपक अग्रवाल के नाम था? क्या इस कंपनी के ओरिजिनल डायरेक्टर्स को पता था कि यह कंपनी बड़ी घोटाले में शामिल है? क्या ये कंपनी बहुत पहले से इस तरह का कला धंदा करते आयी है? .

इस सम्बन्ध में थर्ड आई न्यूज़डेस्क का एक्सक्लूसिव रिपोर्ट मिलता रहेगा, आप बने रहिये थर्ड ऑय न्यूज़ के साथ।

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