चिल्ड्रन’स होम से ४ बच्चे भागे क्यों? कौन है जिम्मेदार? आखिर क्या वजह रही होगी?

थर्ड आई न्यूज़डेस्क, जोरहाट: असम के जोरहाट में रविवार को चार नाबालिग लड़के बाल गृह से फरार हो गए हैं। 10 वर्ष की आयु के दो नाबालिग नागालैंड के मोकोकचुंग के थे और अन्य दो क्रमशः 12 और 13 वर्ष की आयु के थे, जो असम के थे । असम के जोरहाट जिले के चोलाधारा इलाके में बाल गृह नौगांव स्थित एनजीओ शंकर मधेब कृष्णी बिकाश केंद्र चलाते हैं। बाल बचाव गृह से चारों नाबालिग लड़कों के फरार होने के बाद असम के सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया है।

मामले के जांच अधिकारी पदमधर कलिता ने बताया, “बाल गृह की अधीक्षक तुकुमोनी दत्ता ने नाबालिगों के लापता होने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।”

कलिता ने बताया कि सभी लड़के जो नाबालिग हैं, वे रविवार को करीब 6:45 पर जर्जर खिड़की की ग्रिल हटाने के बाद भाग गए ।

यही नहीं, दत्ता द्वारा पुलिस को सूचना दी गई कि एक बड़ा लड़का भी पहले भी कई बार बाल गृह से भाग चुका है और उसे पकड़कर वापस लाया गया है। कलिता ने बताया कि उन्होंने सभी पुलिस स्टेशनों को लड़कों का पता लगाने के लिए अलर्ट कर दिया था।

इन बच्चो को बाल मजदूरी से बचाकर चिल्ड्रन’स होम में रक्खा गया था. आखिर कौन जिम्मेदार है अब? क्यों बच्चों को चिल्ड्रन’स होम से भागना पड़ा? क्या वजह हो सकती है? क्या उन्हें खाने पिने कि समस्या थी या कि उनका देखभाल सही तरह नहीं हो रहा था?

यहाँ केवल पुलिस प्रशाशन पर जिम्मेदारी न देते हुए मनोवैज्ञानिक दृश्टिकौण से देखने कि आवश्यकता है. जरुरत हो तो मनोचिकित्सक कि परामर्श लिए जाय तो बेहतर होगा।

क्या सवालो के घेरे में चिल्ड्रन’स होम के संचालक तुकुमोनी दत्ता को नहीं होना चाहिए? क्या उनके देखरेख और सूझबुघ कि कमी कि वजह से बच्चो ने ऐसा कदम उठाया?

NGO Shankar Madhab Krishti Bikash Kendra की जिम्मेदारी बनती है इन सब सवालो के सदुत्तर ढूंढ़ने की तथा आगे चलके ऐसा कोई कदम बच्चे न उठाये यह सुनिश्चित करने की।

पुलिस प्रशाशन को तुरंत उन बच्चो से बात करना चाहिए जो इस चिल्ड्रन’स होम में रहते हैं और यह जानकारी लेना चाहिए कि क्या चिल्ड्रन’स होम के संचालक की तरफ से कोई ज्यादती हो रही है, क्या कोई अत्याचार होता है, और जरुरत पड़े तो संचालक का भी ट्रेनिंग देना चाहिए।


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