मरियनि के विधायक रूपज्योति कुर्मी बीजेपी में शामिल क्यों होना चाहते हैं? |Ground Zero Report

Assam Congress MLA Rupjyoti Kurmi likely to join BJP

थर्ड आई न्यूज़डेस्क, गुवाहाटी: विधायक रूपज्योति कुर्मी हमेशा चर्चा में रहते हैं और इस बार वे इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने इतने वर्षो बाद अपने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी पार्टी में शामिल होने की ठान ली। हालाँकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या उन्होंने पार्टी ज्वाइन कर लिया या नहीं , मगर कांग्रेस खेमे में उनको लेकर हो रही गहमागहमी से पता चलता है कि रूपज्योति कुर्मी बीजेपी ज्वाइन करने वाले है। इस बीच कांग्रेस ने रूपज्योति कुर्मी को पार्टी से निष्काषित कर दिया।

अब सवाल उठता है कि आखिर इतने बर्षो के बाद रूपज्योति कुर्मी ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन करने की बात क्यों सोची?

क्या वे कांग्रेस पार्टी से खफा थे? क्या उनको कांग्रेस की और से विशेष मर्यादा नहीं मिल पा रही थी? क्या वे कांग्रेस के वर्त्तमान बिधायक दल के नेता या असम प्रदेश के सभापति से संतुष्ट नहीं थे?

या फिर, उन्हें बीजेपी की और से कोई ऑफर मिल रहा है?

हमने इस बारे में जानकारी हासिल की, जो केवल थर्ड ऑय न्यूज़ का पास है, एकदम ग्राउंड जीरो रिपोर्ट।

हमारे रिपोर्टर्स मरियनि के बिभिन्न लोगो से मुलाक़ात की, न केवल मरियनि बल्कि दूर दराज के गांव भी, जहा कि जनता आखिर रूपज्योति को क्यों चाहते हैं? और उन्हें बीजेपी या कांग्रेस पसंद है?

जो बात सामने आई वो सचमुच चौकाने वाला था। यहाँ के वोटर्स पार्टी देखकर नहीं बल्कि रूपज्योति के काम से खुश होकर उसे वोट देते आये हैं। लेकिन लोगो का कहना है कि रूपज्योति कुर्मी आज एक गलत पार्टी में फंस गए हैं जिस वजह से अपने क्षेत्र के डेवलपमेंट का कार्य पूर्ण गति से नहीं चला पा रहे हैं, अगर आज इस इलाके का विकास करना है तो रूलिंग पार्टी में रहना होगा।

बता दें कि मरियनि कोंस्टीटूएंसी में ४०% से अधिक बंगाली समुदाय के लोग हैं, जो बीजेपी को पसंद करते हैं, २०% के करीब Tea ट्राइब समुदाय के लोग हैं जो रूपज्योति को बिनाशर्त समर्थन देते हैं, ३०% के करीब असमिया समुदाय के लोग हैं जिनका वोट डिवाइडेड हैं, और ३ – ४% हिन्दीभाषी हैं जिनका रुझान बीजेपी की और है। बंगाली समुदाय के पहले वाला जनरेशन कांग्रेस को सपोर्ट करता था, मगर आज का जनरेशन BJP को सपोर्ट करता हैं।

मरियानी में मुस्लिम वोटर्स नहीं के बराबर है, यहाँ की राजनैतिक गणित विषय केन्द्रिक है, जैसे नागालैंड बॉर्डर को लेकर समस्या, Tea Tribe की समस्याएं, हिन्दू बंगाली को लेकर CAA , इत्यादि।

इस सारे वातावरण में यह बात तो तय है कि अगर रूपज्योति कुर्मी को आगे चलके बिधायक की कुर्सी बरक़रार रखनी है तो उन्हें बीजेपी ज्वाइन करना ही चाहिए। लिहाजा, रूपज्योति कुर्मी का ये ऐलान करना उनके तथा उनके कोंस्टीटूएंसी के लिए फायदेमंद होता दिखाई दे रहा है।

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