Rajouri Grenade Attack | वीर भूखा ही सो गया था, चिप्‍स बनाने गई थी मां, इसी दौरान ग्रेनेड हमला हो गया। दुःख की ऐसी दास्ताँ…..

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थर्ड आई न्यूज़, ऑनलाइन डेस्क | ‘मैंने अपने वीर के लिए चिप्स बनाए हैं…। इसको बोलो उठे और खा ले…। वीर को चिप्स बहुत पसंद हैं…।‘ इतना कहते ही वीर की मां स्वर्णा देवी फिर बेहोश हो गई। रिश्तेदारों ने चेहरे पर पानी फेंका तो बेसुध हालत में बेबस मां फिर वही बात दोहराने लगी, …मेरे बच्चे मैंने तेरे लिए चिप्स बनाए हैं।

राजौरी शहर के खांडली पुल क्षेत्र में वीरवार रात आतंकियों ने भाजपा के शहरी मंडल अध्यक्ष जसवीर सिंह के घर ग्रेनेड हमला किया था। इस हमले में जसवीर सिंह के तीन वर्षीय भतीजे वीर सिंह की मौत हो गई थी, जबकि परिवार के छह सदस्य बुरी तरह घायल हो गए थे।

राजौरी में आतंकियों के ग्रेनेड हमले ने मासूम वीर की जान ले ली।

मासूम वीर के परिवार के सदस्यों ने बताया कि उसे चिप्स बहुत पसंद थे। वीरवार रात भी वह चिप्स-चिप्स करता सो गया। उसकी मां ने घर के बाहर देखा तो दुकानें बंद हो चुकी थीं। मां को पता था कि वीर जब जागेगा तो चिप्स के लिए जिद करेगा। इसलिए वीर की मां स्वर्णा रसोई में आलू के चिप्स बनाने के लिए चली गई, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। तब पूरा परिवार घर के आंगन में बैठा हुआ था। वहीं पास ही चारपाई पर वीर सो रहा था और रात को खाने की तैयारी चल रही थी। इसी, बीच, कायर आतंकियों ने घर की छत पर चढ़कर ऊपर से आंगन में ग्रेनेड फेंका, जो बिल्कुल वीर की चारपाई के पास जोरदार धमाके के साथ फट गया। वीर सहित घायल परिवार के सात सदस्यों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। जहां मासूम वीर ने दम तोड़ दिया।

परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोका बुरा हाल है। वीर की बुआ बार-बार यही कह रही थी कि वीर का क्या कसूर था। हमारा परिवार हमेशा लोगों के लिए आगे आता रहा है। यह बहुत बड़ी साजिश रचकर हमारे परिवार को निशाना बनाया गया है। इसमें क्षेत्र के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं।

भाई की तलाश कर रहे कर्ण-अर्जुन : वीर के दो अन्य भाई कर्ण और अर्जुन भी इस हमले में घायल हुए हैं। कर्ण की उम्र 12 वर्ष और अर्जुन की 10 वर्ष है। तीनों भाइयों में आपस में काफी प्यार था। तीनों साथ पढ़ते और खेलते थे। दोनों उपचार के बाद अस्पताल से वापस घर लौट आए हैं, लेकिन दोनों हर कमरे में जाकर वीर को ढूंढ रहे हैं और बार-बार परिवार से उसके बारे में पूछ रहे हैं। कोई उन्हें कहता है कि वीर अस्पताल में है तो कोई कहता है कि अब वह कभी वापस नहीं आएगा। अपनी आंखों के सामने इतना बड़ा हमला देख चुके दोनों भाई काफी सहमे हुए हैं।

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जसबीर को नहीं पता वीर अब नहीं रहा : वीर के चाचा और भाजपा के शहरी मंडल अध्यक्ष जसबीर सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल राजौरी में भर्ती हैं। जसबीर में वीर की जान बसती थी। जसबीर को अभी नहीं पता कि वीर अब इस दुनिया को अलविदा कर चुका है। वहीं, वीर की दादी सिया देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें जम्मू रेफर किया गया है।

पर निवाला गले नहीं उतरा:  ग्रेनेड हमले में मारे गए तीन साल के वीर के गम में आज पूरा राजौरी सदमे में है। हर घर में चूल्हा तो जला, लेकिन निवाला किसी के गले नहीं उतरा। शुक्रवार सुबह करीब दस बजे नम आंखों के बीच वीर सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार के सदस्य बार-बार एक ही बात दोहरा रहे थे कि इस मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा था। परिवार के सदस्य कभी बेहोश होते तो कभी वीर के साथ लिपट जाते। रिश्तेदार व शहर के लोग उन्हें बार-बार दिलासा दे रहे थे।

सिपाही हूं, आतंकियों को चुन-चुन कर मारूंगा : वीर सिंह के दादा रमेश सिंह कभी वीर का माथा चूमते तो कभी उसको अपने सीने से लगा लेते और कहते कि मैं तेरी मौत का बदला लूंगा। रमेश सिंह सेना से सेवानिवृत्त सिपाही हैं। वह कहते हैं कि मैं खुद आतंकियों को तलाश कर उन्हें चुन-चुनकर मारूंगा।

अब कौन कहेगा …चाचू नमस्ते : मासूम वीर सिंह के घर के सामने रहने वाले रुबी कुमार ने कहा कि जब वह सुबह अपनी दुकान खोलते तो वीर अपने घर से आवाज लगाता चाचू नमस्ते। अब मुझे कौन सुबह नमस्ते कहेगा।

अब वीर को नहीं लगेगी किसी की नजर : परिवार के सदस्यों ने बताया कि वीर की मां उसे बुरी नजर से बचाने के लिए अक्सर उसके माथे पर काला टीका लगाकर रखती थी, लेकिन अब उसे किसी की नजर नहीं लगेगी।

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