सिग्नेचर इस्टेट | बाकायदा एक साजिश के तहत रुकाया गया मंदिर का निर्माण, छन-छन कर आ रही हैं खबरें

Signature Building

थर्ड आई न्यूज़, गुवाहाटी | थर्ड आई न्यूज़ ने कल सिग्नेचर इस्टेट: कटघरे में भगवान, मंदिर को लेकर हंगामा क्यों है बरपा शीर्षक से एक समाचार प्रकाशित किया था. इस समाचार के प्रकाश में आने के बाद से जहां एक ओर लोगों में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर सिग्नेचर इस्टेट के लोग अब खुलकर इस विषय पर बोलने लगे हैं. मंदिर निर्माण विरोधी गुट की दबंगई के भय से शुरू में लोग इस ज्वलंत मुद्दे पर भी अपनी राय देने में हिचकिचा रहे थे. पर जब हमने उन्हें उनकी पहचान गुप्त रखने का भरोसा दिलाया, तो लोग मंदिर निर्माण के खिलाफ रची साजिश का पर्दाफाश करने एक-एक कर सामने आने लगे.

बहरहाल, अंदरखाने से छन- छन कर आ रही खबरों में बताया गया है कि आम सहमति से मंदिर निर्माण का काम करवाने के लिए एक समिति का गठन किया गया था. उक्त समिति में सुपारसमल बेद, विजय सिंह डागा, राजेश सुराणा और संतोष बंका सदस्य के रूप में थे. समिति को सिग्नेचर इस्टेट के प्रत्येक फ्लैट वालों से बात कर उनकी राय लेने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी. उक्त जिम्मेवारी को निभाते हुए कमेटी ने सभी फ्लैट वालों से उनकी राय जानी.

गौरतलब है कि इस रायशुमारी का स्कोरकार्ड मंदिर निर्माण के हक में गया. 88 फ्लैट वालों ने मंदिर निर्माण के पक्ष में अपना मत रखा. 22 लोग मंदिर निर्माण के विरोध में थे तथा 2 लोगों ने तटस्थ रहने में समझदारी समझी. बताया जा रहा है कि 133 में से बाकी बचे हुए फ्लैट अनसोल्ड या फिर अनऑक्यूपाइड थे.

जैसा कि हमें बताया गया, अब घटनाओं की क्रोनोलॉजी कुछ इस तरह आगे बढ़ती है. गत वर्ष 28 सितंबर को उक्त कमेटी ने सिग्नेचर इस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन की सालाना सभा यानी एजीएम में अपनी रिपोर्ट रखी. चार सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में न केवल मंदिर निर्माण के पक्ष में आंकड़ों का हवाला दिया गया, बल्कि यह भी कहा गया कि मंदिर बनने में कोई अड़चन नहीं है. ये सारी बातें एजीएम के प्रतिवेदन यानी मिनिट्स में दर्ज है. यहां यह बात दीगर है कि मंदिर विरोधी तत्वों ने उक्त एजीएम में भी हंगामा खड़ा करने में कोई कोर – कसर नहीं छोड़ी थी. मामले को लटकाए रखने के लिए उन्होंने दलील दी कि इस विषय को अगली कार्यकारिणी समिति के बैठक में लेकर उस पर चर्चा की जानी चाहिए, लेकिन बहुसंख्यक लोगों के विरोध के कारण उनकी एक नहीं चली और एजीएम में बिल्डर राजेश सुराणा और आर्किटेक्ट संतोष बंका की अगुवाई में एक मंदिर निर्माण समिति का गठन कर दिया गया.

इस समिति को मंदिर निर्माण का काम जल्द से जल्द शुरू करने का कार्यभार दिया गया था. ऊपरी तौर पर देखने में लगता है कि 28 सितंबर की एजीएम के बाद सब कुछ सलट गया, सामान्य हो गया, पर सही मायने में ऐसा हुआ नहीं. अब शुरू हुआ अंदर ही अंदर पर्दे के पीछे से भीतराघात का दौर. साम- दाम- दंड – भेद की नीति अपनाते हुए मंदिर विरोधियों ने भगवान के घर की राह में रोड़े अटकाने शुरू कर दिए. इसके चलते सुराणा – बंका की सक्षम जुगलजोड़ी भी मंदिर निर्माण की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाई.

इस बीच हुई एग्जीक्यूटिव कमेटी की एक बैठक में उन दोनों से मंदिर निर्माण का काम त्वरित गति से करने को कहा गया और 22 अप्रैल 2021 को भूमि पूजन की तारीख तय कर दी गई. मंदिर विरोधी इस घटनाक्रम से तिलमिला गए. जब उन्होंने देखा कि उनका हर दाव खाली जा रहा है, तो उन्होंने कानूनी दांवपेच का सहारा लेकर मंदिर निर्माण का काम रुकवाने का षड्यंत्र रचा. 22 अप्रैल को भूमि पूजन होना था, पर 21 अप्रैल को ही अंधे कानून का सहारा लेकर स्टे ले आया गया.

मंदिर निर्माण पर स्टे यानी इंजंक्शन की जानकारी मिलते ही मंदिर के पक्षधर सकते में आ गए. सिग्नेचर इस्टेट में उत्तेजना और नाराजगी का माहौल पसर गया. कुछ लोगों की सनक और निहित स्वार्थ की राजनीति के कारण एक साथ मिलजुल कर रह रहे लोगों के बीच सांप्रदायिक विभाजन की रेखा खींच गई.

लोगों ने थर्ड आई न्यूज को बताया कि जिन तर्कों और तथ्यों के आधार पर मंदिर निर्माण पर स्टे लाया गया है, वे तो दरअसल मंदिर विरोधियों के एजेंडे में ही नहीं थे. उनका कहना है कि मंदिर का विरोध करने वाले किसी तार्किक या तकनीकी कारणों से मंदिर निर्माण से परहेज नहीं कर रहे थे. उनका माइंडसेट पूरी तरह सांप्रदायिक था. वे नहीं चाहते हैं कि सिग्नेचर इस्टेट में सनातनियों का मंदिर बने. जब बहुमत ने मंदिर निर्माण के पक्ष में एकतरफा फैसला सुना दिया, तो मंदिर विरोधियों ने इसे अपने ईगो पर ले लिया और अदालत तक चले गए. बहरहाल, इस मुद्दे पर समूचे समाज में मंदिर विरोधियों की थू- थू हो रही है. लोग कह रहे हैं कि राम से बैर रखने वालों की खैर नहीं.

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