तपस्वी सुनील सुराणा ने की नौ की तपस्या

9 din tapasya

नगांव 17 अगस्त डिंपल शर्मा | जैन धर्म में तपस्या का बड़ा महत्व है, खासकर चातुर्मासिक महापर्व के दौरान ।तपस्या से मनुष्य के अंदर छिपी हुई शक्ति जागृत होती है, जिसके कारण उसे आध्यात्मिक सुख की अनुभूति होती है ।

तपस्या से पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा तो होती है और इससे तपस्वी की आत्मा भी निर्बल बनती है ।यही वजह है कि आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी संगीत श्री जी एवं अन्य साध्वी वृंद जो कि वर्तमान में सिलचर में विराजमान है की प्रबल प्रेरणा से नगांव के श्री सुनील सुराणा ( सुपुत्र स्व.शिखर चन्द- बिमला देवी सुराणा) ने नौ दिनों की तपस्या सूर्यास्त से पहले पानी का सेवन कर पूर्ण की है ।

कोरोना कि इस विकट परिस्थिति में भी सुनील ने मजबूत मनोबल का परिचय देते हुए आध्यात्म की ओर कदम बढ़ाया है। नौ दिनों की व्रत साधना में मनुष्य का नौ दिनों तक भूखे रहना बहुत कठिन साधना है और जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं को वश में रख सकता है वही व्यक्ति तप कर सकता है। श्री सुनील सुराणा ने नौ दिनों की तपस्या कर अपने परिवार व समाज का गौरव बढ़ाया है। सुनील का कहना है कि गुरुदेव की असीम कृपा एवं साध्वी वृंद की प्रेरणा और परिवार के सहयोग से यह तपस्या पूर्ण हो पाई। सुनील की माता, धर्म पत्नी, पुत्र व पुत्री ने भी तपस्या पर खुशी व्यक्त की है।

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा नगांव, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद व समाज के अन्य व्यक्तियों ने सुनील के घर जाकर जप व धार्मिक गीतिकाओं का संगान किया तथा तीनों संस्थाओं ने साहित्य व अन्य सामग्री भेंट कर युवा सुनील सुराणा के तप का अभिनंदन किया व समाज के प्रत्येक व्यक्ति ने सुनील की तपस्या की अनुमोदना की व उसके ज्ञान, ध्यान, तप में वृद्धि हो यह शुभकामनाएं दी

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